मेरी चौखट पे चल के आज, मेरे वीर आए हैं
बजाओ ढोल स्वागत में, मेरे घर वीर आए हैं
सुदी चैत्र तेरस, को प्रभु महावीर जन्मे थे
मनाया मिलके मंगल, इंद्रो के भी इंद्र हर्षे थे
बहुत खुश है धरा भी आज, मेरे महावीर आए हैं
बजाओ ढोल स्वागत में, मेरे घर वीर आए हैं
तुमको पाके क्या पाया है, सृष्टि के कण-कण से पूछो
रोम रोम में आप बसे हो, जिन शासन की शान तुम ही हो
तेरे द्वारे जो भी आए, नइया उनकी पार लगाए
बड़ी लंबी इंतजारी हुई, महावीर तुम्हारी, तब आई है सवारी
संदेशे आज खुशियों के, हमारे नाम आए हैं
बजाओ ढोल स्वागत में, मेरे घर वीर आए हैं
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